आचार्य बालकृष्ण जी की जीवनी | Acharya Balkrishna Biography in Hindi

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Acharya Balkrishna Biography 

सबसे पहले हम  आचार्य बालकृष्ण जी की Short bio पढ़ते हैं।

जन्म तिथि  4 अगस्त, 1972
जन्म स्थान   नेपाल
धर्म Religionहिन्दू (Hinduism)
लोकप्रियताआयुर्वेद मनीषी,  आयुर्वेद आचार्य, पंतजलि सीईओ
भाषा ज्ञान हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत
पत्नी Wifeअविवाहित. (Unmarried)
Car name Range Rover
balkrishna net worth in rupees Rs. 1.8 Lakh Crores
Current AddressHaridwar City
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आचार्य बालकृष्ण जी का बचपन और शुरुआती जीवनी 

आज के धन्वंतरि, आयुर्वेद मनीषी बालकृष्ण जी का शुरुआती 25 साल का जीवन सफर बहुत दुःखो भरा था। वो गुरुकुल में रोटी बनाते थे। इसके अलावा वो हर काम जो भारत का समान्य से गरीब आदमी करता हैं, जैसे;- लकड़ी काटना, गोबर उठाना, पशुओं को खिलाने का चारा उठाना, आटा चक्की पीसना सभी काम किये। उनका जन्म भारत के एक नेपाली परिवार में हुआ था। काठमांडू से 200 किलोमीटर दूर एक छोटा सा गांव हैं। उनके माता-पिता आज भी गांव में एक साधारण – सादा जीवन जीते हैं। वे उनके गाँव में ही खुशी से शांतिपूर्ण अपना जीवन बिता रहे हैं। स्वामी रामदेव जी से उनकी पहली बार मुलाकात हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के खानपुर गुरुकुल में हुई थी। गुरुकुल की शिक्षा खत्म होने के बाद आचार्य बालकृष्ण जी हिमालय पर जड़ी-बूटियों की तलाश में निकल गये। इसके अलावा उन्होंने हिमालय की गुफाओ में साधना भी की। बचपन में उन्होंने सिर्फ गुरुकुल में शिक्षा- दीक्षा ली, इसके बावजूद आचार्य जी के सामने आज दुनिया के बड़े- बड़े व्यकि, बिज़नेसमेन नतमस्तक होते हैं।  महर्षि चरक , सुश्रुत व धन्वतरि आदि के बाद ऋषि परम्परा के इतिहास का सबसे बड़ा ग्रंथ लिखने के लिए सम्पूर्ण विश्व आचार्य जी का ऋणी रहेंगा। आपको जानकार अच्छा लगेंगा, आज बालकृष्ण जी भारत के 8 वे सबसे अमीर आदमी हैं। यही नही आज उनका इंटरव्यू भारत के हर बड़े मीडिया ने लिया है जो इंटरनेट पर उपलब्ध हैं। इसके अलावा आचार्य जी को वर्ल्ड इकोनॉमिक फॉर्म, बिजनेस समिट में भी आमंत्रित किया गया जहाँ पर उन्होंने अपनी शानदार शुद्ध हिंदी भाषा में पूरे देश का दिल जीत लिया।

 

उपलब्धियां और सम्मान

1.) पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट, पंतजलि रिसर्च फाउंडेशन, पतंजलि ग्रामोद्योग व दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट आदि संस्थाओं के आचार्य बालकृष्ण जी महाराज संस्थापक महामंत्री हैं। पंतजलि विश्वविद्यालय के बालकृष्ण जी कुलपति है। साथ ही आचार्य जी आचार्यकुलम (गुरुकुल) के मार्गदर्शक व निदेशक भी हैं।

2.) आयुर्वेद के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए हरियाणा व पंजाब के महामहिम राज्यपाल श्री कप्तान सिंह सोलंकी ने आचार्य जी को ” भारत गौरव ” अवॉर्ड से सम्मानित किया।

3.) पुणे शहर के संत श्री ज्ञानेश्वर गुरुकुल में महान इतिहास आचार्य स्वर्गीय डॉ श्रीपाद  कुलकर्णी की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में आचार्य जी को ” भीष्म”  पुरस्कार से  सम्मानित किया।

 

आचार्य बालकृष्ण जी से सीखें सफलता के गुर

● कार्य के अच्छे से न होने का कारण मन की चंचलता है, जिसे योगाभ्यास से दूर किया जा सकता है।

● काम करते समय यदि उससे मिलने वाले फल की इच्छा मन में बनी रहे, तो काम पूर्ण एकाग्रता के साथ नही हो पाता।

● एकाग्रता होने पर ही विषय को देखना, समझना, याद करना, व्यवहार में लाना और फिर सफलता पाना संभव हैं।

● तत्काल सही फैसले लेने के लिए तीव्र बुद्धि का होना अनिवार्य हैं, जबकि तेज बुद्धि के लिए अनिवार्य हैं – स्वाध्याय, ध्यान, समाधि।

● दूसरों को कष्ट दिए बिना यदि सचाई, ईमानदारी, निष्ठा और पूरी शक्ति से कार्य करते रहे, तो सफलता के रास्ते अपने आप बनते जाते हैं।

● छोटी और अस्थायी सफलता तो आदमी को अपनी कार्यदक्षता के कारण मिल सकती हैं, किंतु बड़ी और स्थायी
सफलता पाने के लिए श्रेष्ठ चरित्र और पूर्ण समर्पण भी साथ में होना जरूरी हैं।

● कम्पटीशन हमेशा खुद से हो, ताकि हमारा हर अगला कदम, हमारे पिछले कदम से बेहतर हो।

● हम खुद से बड़े नही बन जाते, बल्कि हमारे अच्छे कामों को देखकर समाज ही हमें बड़ा बनाता हैं।

● काम में जितना अधिक समय देंगे, उतनी ही अधिक सफलता पाएंगे, लेकिन टाइम नही देने में देर कर देंगे, तो हानि भी उठाएंगे।

● सफलता का कोई शॉर्टकट न पहले कभी था, न है और न आगे कभी होंगा।

● बड़ी-बड़ी डिग्रिया हासिल कर लेना, सफलता के शिखर पर पहुँचने के लिए अनिवार्य नही हैं।

● आदर्श व्यक्ति को सामने रखकर जब हम काम करते हैं, तब हमें एहसास होता हैं अभी और कितना तप, मेहनत और साधना करनी हैं

● जनता की माँग के अनुरूप निर्मित उत्पाद बाजार में छा जाता है, जैसे दंतक्रान्ति टूथपेस्ट। इसका पेस्ट या जैल वाला  रूप हैं। नयी पीढ़ी के लिए और उसमें जो जड़ी-बूटी हैं, वे पुरानी पीढ़ी के लिए हैं। (मेरी राय मान सकते हैं 10 % या 1% टूथपेस्ट में कुछ केमिकल हो, पर 90 प्रतिशत तो आयुर्वेदिक है, ना? बाकी सारी विदेशी/देशी कंपनियों के टूथपेस्ट को उठा कर देख लो शत प्रतिशत कैमिकल और जहरीली है। आपको जानकारी के लिए बता दू, पतंजलि ‘दिव्य दन्त मंजन भी आता है।

● आध्यात्मिक व्यक्ति का व्यापार, मात्र उसका व्यापार न होकर देश की अर्थव्यवस्था मजबूत बनाने, रोजगार बढ़ाने, जनता के जीवन स्तर को ऊँचा उठाने और धर्म व संस्कृति के सरंक्षण का एक माध्यम भी होता हैं।

बालकृष्ण जी महाराज के अनमोल कथन (Acharya Balkrishna quotes in Hindi)

1. हमारे बच्चों को कोमल दिल-दिमाग में बचपन से ही स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक एक भोगवादी विचार को बहुत ही चतुराई से डाला जाता हैं। की जीवन में सब टेस्ट एक बार जरूर लेकर देखने चाहिए, जबकि हमारे पुर्वज ऋषि-ऋषिकाओ, वीर-महापुरुषों का यह मानना हैं कि पाप, अनाचार, दुराचार, नशा, मांसाहार, अश्लील, अनैतिक एंव अधार्मिक कार्य को एक बार भी नही करना चाहिए। क्या हम साइनाइड का एक भी बार टेस्ट लेकर देखेंगे? क्या हम बिजली के करंट या आग में हाथ डालकर देखेंगे?

 

हम सब मिलकर चंद्रशेखर, राजगुरु, सुखदेव, भगतसिंह के सपनो का भारत, लौह पुरुष सरदार वलभ भाई पटेल, स्वामी विवेकानंद और महर्षि दयानंद के सपनो का भारत बनाने  के लिए अपने-अपने लेवल पर अच्छे कर्म करेंगे वह अपने देश की सेवा करेंगे।

 

3. हम अपने जीवन में संकल्प लें कि आयुर्वेद विज्ञान का पालन करके व प्रतिदिन योग करके अपने आपको स्वस्थ रखेंगे और कभी आपातकालीन परिस्थिति में चिकित्सा (दवाई) की आवश्यकता पड़ी तो स्वदेशी से ही अपना उपचार करेंगें।

 

4. हमारे जीवन में आने वाली हर परेशानी में परमात्मा की शक्ति हमें मिलती रहती हैं। जब हम सच्चे मन से कर्म करते है, तो भगवान की शक्ति हमारे साथ रहती हैं, ऐसा मैने अब तक अनुभव किया।

 

5. जड़ी- बूटी की भव्यता को हम और अधिक भव्य बनाने का कार्य कर रहे हैं। यदि वनस्पतियाँ नही रहेंगी तो हमारा जीवन भी नही रहेंगा। औषधीय पौधे लगाकर हम स्वयं का ही उपकार कर रहे होते हैं। इसलिए अधिक औषधीय पौधो का रोपण करें, यही हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ उपहार हैं।

6. जो विदेशी कंपनिया भारतीय औषधीय पौधों, मसालो और आयुर्वेद का माजक उड़ाती थी वही आज पंतजलि कंपनी की सफलता से और डर से अपने हर उत्पाद में कुछ न कुछ जड़ी बूटियां मिलाकर लोगो कोअपनी और आकर्षित कर रही है। पर अब जनता समझ चुकी हैं, क्या सही है और क्या गलत।

जरूर पढ़ें ⇒  आचार्य बालकृष्ण जी के 30 आयुर्वेदिक नुस्खे 

 

वर्ल्ड हर्बल इनसाइक्लोपीडिया के बारे में सम्पूर्ण जानकारी (world herbal ensclopedia by balkrishna in hindi)


आचार्य बालकृष्ण द्वारा रचित वर्ल्ड हर्बल इनसाइक्लोपीडिया मतलब ” विश्व भैषज संहिता ”  एक्सपर्ट इसे सभी चिकित्सा पद्तियो की प्रेरक पुस्तक व आयुर्वेद का वरदान मानते हैं। इसमें विश्व की सभी चिकित्सा पद्तियो में उपयोगी अनेक औषधिय पौधे लगभग (68 हजार) का प्रचलित नामो और गुणों सहित वर्णन हैं। इस वजह से यह आयुर्वेद के साथ-साथ अनेक अन्य चिकित्सा पद्तियो के लिए भी बेहद लाभदायक मानी जा रही हैं। पूरी दुनिया को इसका लाभ मिले इसलिए इस पुस्तक को दुनिया की 120 भाषाओं में प्रकाशित किया जा रहा हैं। आचार्य जी ने बताया की, विश्व भैषज संहिता दुनिया लेवल पर विभिन्न जड़ी-बूटियों की संख्या लगभग 4.5 लाख हैं।  इसमें से सिर्फ 68000 जड़ी-बूटियों प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता है। इसमें से 15 से 20 हजार जड़ी-बूटियों केवल भारत में पायी जाती हैं। इस प्रकार वर्ल्ड हर्बल इनसाइक्लोपीडिया दुनियाभर में पाई जाने वाली जड़ी-बूटियो की जानकारी प्राप्त करने की बेस्ट पुस्तक हैं। इसके अलावा आचार्य जी ने कहा, की इस ग्रंथ को लिखने में पंतजलि के 200 अनुसंधानकर्ता का भी पुरुषार्थ लगा हुआ हैं। इस संहिता में कई प्रकार के पेड़-पौधों के 25 हजार जीवंत चित्र, कैनवास चित्र व 35 हजार रेखाचित्रो को प्रकाशित किया गया हैं।

FAQ सवाल जवाब

आचार्य बालकृष्ण जी ने भारत के लिए क्या योगदान दिया?

दुनिया भर की विलुप्त होती हजारो दुर्लभ औषधियों और जड़ी – बूटियो को बचाया। उस पर अनुसंधान कर दुनिया भर में जड़ी-बूटियो से चिकित्सा का प्रचार किया। आज भारत की 80 प्रतिशत आबादी उनकी ऋणी है। क्योंकि उन्होंने निस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा की है।

 

आचार्य बालकृष्ण जी का मोबाइल नंबर बताइए (acharya balkrishna phone numbers,  whatsapp, Contact details)

Call  or dial ⇒+91-1334-240008,

आचार्य बालकृष्ण जी के घर का पता क्या है? (House Address)

Divya Yog Mandir Trust,

Patanjali Yogpeeth, Maharshi Dayanand Gram, Delhi-Haridwar National Highway, Near Bahadarbad, Haridwar-249405 Uttarakhand, India.

Video Balkrishna ji patanjali CEO 

आचार्य बालकृष्ण जी के 30 आयुर्वेदिक नुस्खे

आचार्य बालकृष्ण जी के सदवाक्य आपके जीवन संघर्ष को काफी हदतक कम करने की ताकत रखते है। आचार्य जी ने शून्य से शिखर तक का सफर तय करने में उन्होंने जो कुछ भी सीखा, वो इस पोस्ट के जरिये आप सीखेंगे। आचार्य बालकृष्ण इस समय वर्तमान आयुर्वेद ऋषि और भारत के 8 वे सबसे धनवान व्यक्ति हैं उनके सदवाक्यो को जीवन में उतारकर अपने मानव-जीवन को सर्वश्रेष्ठ बनाये। पतंजलि के सीईओ से लेकर भारत के दस शीर्ष धनीव्यक्ति बनना कोई आम बात नही है। इसलिए इनके सभी सफलता के सूत्र और आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खों को जानना जरूरी है।

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Patanjali Ceo Quotes

 

आचार्य बालकृष्ण जी के घरेलू नुस्खे

● प्राकृतिक जीवन जीने वाला दीर्घायु होता हैं, जबकि प्रदूषित जीवन जीने वाला अल्पायु ।

स्वप्नदोष   – सुबह-सुबह एक गिलास लौकी का रस पीयें। दूसरा उपाय हैं, सपने में जब पहली बार गंदे -अश्लील चित्र दिमाग में दिखे, तो उसी समय उठकर, अपनी सुबह की दिनचर्या ( नहाना, कुछ काम करना, पढ़ना) पर लग जाओ  या नाम का उच्चारण करो। इससे आप वीर्य-स्खलन से बच जाओंगे। वह काफी ऊर्जा नष्ट होने से बच जायेंगी।

 

● शारिरिक-मानसिक शक्ति बढ़ाने के लिए पर्याप्त व्यायाम, प्राणायाम, ध्यान व विश्राम करने वाले व्यक्ति अपनी बढ़ी हुई शक्ति के द्वारा अधिक काम कर, उतने ही अनुपात में सफलता प्राप्त कर सकता हैं।

 

● यदि आपके मुँह से दुर्गन्ध आती हैं, तो उसे दूर करने के लिए थोड़ा सा भुना जीरा धीरे-धीरे चूसते हुए चबा-चबाकर खाए।

 

● सेब का पेड़ बहुत गुणकारी है। अगर आपके पास खेत या फार्म हाउस हो तो, सेब का पेड़ अवश्य लगाएं, इस पेड़ के पत्ते भी विभिन्न प्रकार के रोगों के उपचार के लिए काम में लिये जाते हैं।

 

● कुछ औषधीय पौधे जो आपके घर/खेत  में अनिवार्य होने जरूरी है जिसमें ग्वारपाठा (एलोवेरा), तुलसी (वन, श्याम और सामान्य) तीनो प्रकार की। इन तीनो पौधों के जब आप लाभ पढ़ेंगे, तो आपकी बुद्वि चकरा जाएगी।  इन तीनो पौधों में 150 से ज्यादा छोटी-मोटी बीमारियों को खत्म करने की क्षमता है।

आचार्य बालकृष्ण जी की जड़ी बूटी (acharya balkrishna ayurveda tips in hindi)

1. रक्त केंसर  के रोगियों को गेहूं के ज्वारे के साथ गिलोय स्वरस मिलाकर दिया तो देखा, की ब्लड कैंसर के रोगियों में बहुत लाभ हुआ।

 

2. गिलोय को पानी में घिसकर गुनगुना करके कान में 2-2 बूंद दिन में दो बार डालने से कान का मैल निकल जाता हैं। वह गठिया रोग में – 2-5 ग्राम गिलोय चूर्ण को दूध के साथ दिन में दो-तीन बार देने से गठिया में लाभ होता है।

 

3. पपीते के दूध ( आक्षीर ) को जीभ पर लगाने से जीभ पर होने वाला घाव जल्दी भर जाता हैं। वह कंठ रोग में- पपीता से प्राप्त दूध को जल में मिलाकर गरारा करने से गले  के रोगों में लाभ होता हैं।

 

4. तिल और मिश्री को उबालकर पिलाने से सूखी खांसी मिटती हैं। वह बच्चों का मूत्र रोग- रात्रि में बच्चे बिस्तर गीला कर देते हैं। उनके लिए तिल का लंबे समय तक सेवन बहुत लाभकारी हैं।

 

5.  विष चिकित्सा – तिल औऱ हल्दी को पानी में पीसकर लेप करने से मकड़ी का विष दूर होता हैं। तिल को पानी में पीसकर लेप करने से बिल्ली का विष तथा सिरके में पीसकर मलने से भिरड़ ( बरैं ) का विष दूर होता हैं।  इस प्रकार सर्दियों में तिल व तिल के तेल का उपयोग करें और शरीर के अंग,-प्रत्यंग को स्वस्थ पोषण दे।

 

6.  नेत्र रोगों में  5-10 तुलसी पत्र स्वरस को दिन में कई बार आँखों में डालने से रतौंधी  में लाभ मिलता हैं। तुलसी का पौधा मलेरिया प्रतिरोधी हैं। तुलसी के पौधों के संपर्क में आने से हवा में कुछ ऐसा प्रभाव आता हैं, की मलेरिया के मच्छर वहाँ से भाग जाते हैं।

 

7. दूर्बा (रामघास) पौधा- दूब को मिश्री के साथ घोट छान कर पिलाने से पेशाब के साथ खून आना बंद हो जाता हैं।

 

8. बेल के कोमल पत्र निरोगी गाय के मूत्र में पीसकर तथा चार गुना तिल तैल तथा 16 गुणा बकरी का दूध मिलाकर मंद (कम) आग पर पकाकर तैल मात्र शेष रहने पर छान के रख लें। इसे नित्य कानो में डालने से बहरापन, सनसनाहट, कानो की खुश्की, खुजली आदि दूर होती हैं।

 

9. लौंग के सेवन से भूख बढ़ती हैं। अमाशय की रस क्रिया को बल मिलता हैं। लौंग पेट के कीड़ो को खत्म करता हैं। यह शरीर की बदबू को दूर करता हैं।

 

आचार्य बालकृष्ण जी के 15 सफलता सूत्र (Patanjali Ceo Success Rule)

1.) ज्ञान के अनुरूप संकल्प, संकल्प के अनुरूप इच्छा, इच्छा के अनुरूप कर्म और कर्म के अनुरूप ही फल प्राप्त होता हैं।

 

2.) एक ही जिंदगी में व्यक्ति सारे कामो में सफल नही हो सकता, लेकिन जिसमें वह सफल हो सकता हैं, उसे करने के लिए भी उसके पास बेसिक ज्ञान का होना अनिवार्य हैं।

 

3. मैं एक ऐसे परिवार में पैदा हुआ, जहाँ पर सारी बुनियादी सुविधाओं का अभाव था, इसके बावजूद आज भारत वह दुनिया में आचार्य जी का नाम विख्यात हैं इसलिए  आपकी जैसी भी वर्तमान की परिस्थितिया हो, आप उसे बदल सकते हैं।

 

4. मुझे तो आज भी प्रकृति माता की गोद में खेलने का आनंद आता है। मैं, जंगल, झरने, पेड़-पौधों के बगैर बिल्कुल नही रह सकता।

 

5.  किसी वस्तु की प्राप्ति की इच्छा जितनी तीव्र होंगी, व्यक्ति उतनी ही शीघ्रता से कर्म कर उस वस्तु को प्राप्त कर लेंगा।

 

6. उपलब्धि और सुख की जितनी बडी चाह मन में होंगी, उसे पूरा करने के लिए बड़ा पुरुषार्थ भी करना पड़ेंगा।

 

7. मंजिल सदा उन्ही को मिलती हैं, जो उसे पाने की राह पर चलते हैं।

 

8.  योजनाबद्ध तरिके से आदमी सफलता, समृद्धि और सुख- शान्ति को प्राप्त कर सकता हैं।

 

9. घण्टे और मिनट देख- देखकर कार्य करने वाला आदमी घण्टे और मिनट के हिसाब से ही प्रगति करता हैं।

 

10. प्रतिकूलता में बिना रुके तेजी से भागने वाला व्यक्ति, अनूकूलता में तो और भी तेजी से भागता हैं।

 

11. जो व्यक्ति जितना अधिक सांसारिक सुख- भोग की इच्छाओं में डूबता जाएंगा। वह अपने लक्ष्य से उतना ही अधिक दूर होता हैं।

 

12. बड़े काम करने वाले लोग मोह-माया, अभिमान आदि आंतरिक विकारों से परे होता हैं।

 

13. मोह, राग, हिंसा और झूठ जैसे दुर्गुण जितने कम होंगे, हम परमात्मा के उतने निकट जायेंगे।

 

14. वैराग्य भाव हो तो व्यक्ति मुसीबतों में भी मस्ती से काम करता हैं

 

15. उत्साह हमारे अंदर बाधाओं से टकराने और तेज गति से काम करने की ऊर्जा पैदा कर सफलता की और तेजी से ले जाता हैं।

 

16. आप कोई भी उत्पाद बाजार में बेच रहे हो पहले खुद उपयोग करो/ फिर परिवार को उपयोग करवाओ उसके बाद ही बाजार में सेेेल करो। विदेशी कंपनियों ने भारत को बाजार बना दिया है।

हमारी दिनचर्या कैसी हो? (acharya balkrishna speech on daily routine)

1.आयुर्वेद के अनुसार प्रातःकाल उठकर नहाने के बाद या पहले अपनी हथेलियों को देखे, अपने चेहरे को काँच में देखे।

2. शाम को 9 बजे सोने की आदत डाले सुबह जल्दी उठने के लिए।

3. अगर दिनचर्या व्यवस्थित होगी, तो जीवन व्यवस्थित, मन में एकाग्रता और शांति होंगी, जिससे सफलता की राह में बढना भी आसान होंगा।

4. सेहतमंद आदमी ही लगातार प्रगति करने, दुःखो से मुक्ति पाने और सुखों का आनंद उठाने में सक्षम होता हैं।
5. मोटापा, बी.पी, मधुमेह आदि वेस्टर्न लाइफस्टाइल से जन्मी बीमारियों को, अपनी दिनचर्या व खान-पान को सही करके इसे रोका जा सकता हैं
6. बाजरा, ज्वार, गेहूँ आदि अनेक अनाजो को मिलाकर खाने से हम कुपोषण से होने वाले बहुत सारे रोगों से बच सकते हैं।
7. आँवले का रस हमारी कब्ज, बालो का झड़ना, कमजोर नजर आदि समस्याओं का नेचुरल उपचार है।
8. शुद्ध सात्विक भोजन से व्यक्ति सेहतमंद, कार्य मे समर्थ और फिर सफल होता हैं।
9. थकान, तनाव, सिरदर्द, मोटापा, कब्ज, आदि 20 रोगों का एक कारण हैं- फास्टफूड और जंकफूड।

यह भी पढ़े ⇒ आचार्य बालकृष्ण जी के घर का पता

स्वदेशी कोट्स आचार्य बालकृष्ण जी

● हमें इस देश में दम तोड़ रही स्वदेशी चिकित्सा, देश की भाषा, स्वदेशी शिक्षा, स्वदेश की संस्कृति, स्वदेश की अर्थव्यवस्था, स्वदेशी कृषि और सभ्यता को गौरव दिलाने के लिए सबको एकजुट होना पड़ेंगा।

● आज भी देश देश में ईस्ट इण्डिया कंपनी की तरह ही हजारो कंपनीया देश को आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक व राजनैतिक तौर पर खोखला करने में लगी हैं।

● शून्य तकनीक की विदेशी वस्तुओं के 100 प्रतिशत बहिष्कार का संकल्प करें।

● आज भी लगभग 50 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था पर विदेशी कंपनियों का कब्जा हैं। वह 20 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था पर चीन का कब्जा हैं।

● यूरोप और दुनिया के ताकतवर देश भारत को एक बाजार समझ कर, यहाँ लूटमार और तरह-तरह के अत्याचार करने में लगे हुए

● विदेशी दासता की देश में कोई जगह नही। देश का हर युवा किसी एक स्वदेशी वस्तु का कारोबार करे, और उसे पूरे विश्व तक लेके जाये।

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